
–मेडिकल कॉलेज के सामने अतिक्रमण हटाकर प्रशासन ने निभाई औपचारिकता? बड़े मगरमच्छों पर आज भी कार्रवाई का इंतजार
–भूदान की जमीनों पर भी विकसित हो रही है कॉलोनी, उठी कार्रवाई की मांग
शिवपुरी
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शिवपुरी में भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और इसकी शुरुआत शहर से करने के निर्देश दिए थे। उनके इस ऐलान के बाद उम्मीद जगी थी कि शहर में जमीनों पर अवैध कब्जे करने वाले रसूखदारों पर भी प्रशासन का शिकंजा कसेगा। लेकिन अब तक की कार्रवाई को देखें तो सवाल उठने लगे हैं कि क्या भूमाफियाओं के खिलाफ प्रशासन की मुहिम केवल अतिक्रमण हटाने तक ही सीमित रह गई है?शहर में मेडिकल कॉलेज के सामने गरीबों के स्टॉल पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जरूर देखने को मिली, लेकिन बड़े और रसूखदार भूमाफियाओं के खिलाफ किसी बड़ी कार्रवाई का इंतजार अब भी बना हुआ है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या प्रशासन की कार्रवाई का दायरा केवल सड़क किनारे किए गए अतिक्रमणों तक ही सीमित रहेगा या फिर उन लोगों तक भी पहुंचेगा, जिन पर सरकारी जमीनों पर कब्जे, बेशकीमती जमीनों के अवैध इस्तेमाल और नियमों को ताक पर रखकर जमीनों का कारोबार करने जैसे आरोप लगते रहे हैं?
छोटे अतिक्रमणों पर कार्रवाई, बड़े मगरमच्छों पर खामोशी क्यों?
मेडिकल कॉलेज के सामने अतिक्रमण हटाना प्रशासनिक कार्रवाई का हिस्सा है, लेकिन भूमाफियाओं के खिलाफ निर्णायक अभियान का मतलब इससे कहीं व्यापक है। शहर में यदि अवैध कब्जों और जमीनों से जुड़े गंभीर मामलों की शिकायतें हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी जरूरी है।यही वजह है कि अब प्रशासन की कार्रवाई की प्राथमिकताओं पर सवाल उठ रहे हैं। क्या बड़े भूखंडों पर कथित अवैध कब्जों की जांच की जा रही है? क्या सरकारी जमीनों पर कब्जे की शिकायतों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है? क्या नियमों के विरुद्ध विकसित की गई कॉलोनियों और जमीनों के संदिग्ध सौदों की जांच हो रही है? इन सवालों पर प्रशासन की ओर से ठोस और सार्वजनिक जानकारी सामने आना जरूरी है।
सिंधिया के निर्देशों का असली इम्तिहान अभी बाकी
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्देशों के बाद शहरवासियों को उम्मीद थी कि भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई में किसी तरह का भेदभाव नहीं होगा। माना जा रहा था कि प्रशासन छोटे-बड़े सभी मामलों की जांच करेगा और रसूख के आधार पर किसी को राहत नहीं मिलेगी।लेकिन यदि कार्रवाई का प्रमुख उदाहरण केवल मेडिकल कॉलेज के सामने से हटाया गया अतिक्रमण ही है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि व्यापक अभियान का क्या हुआ? सिंधिया के निर्देशों को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की है। अब प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि भूमाफियाओं के खिलाफ क्या कार्ययोजना बनाई गई, कितने मामलों की जांच हुई और बड़े मामलों में कार्रवाई की स्थिति क्या है या फिर अमला हर बार की तरह सिर्फ नोटिसों तक ही सीमित होकर रह जाएगा।
क्या रसूखदारों तक पहुंचेगा प्रशासन का बुलडोजर?
भूमाफियाओं के खिलाफ किसी भी अभियान की सफलता इस बात से तय होती है कि कार्रवाई कितनी निष्पक्ष है और क्या वह प्रभावशाली लोगों से जुड़े मामलों में भी समान रूप से आगे बढ़ती है। केवल दिखाई देने वाले अतिक्रमण हटाना पर्याप्त नहीं है, यदि गंभीर शिकायतों की जांच लंबित है। प्रशासन को राजस्व रिकॉर्ड, सरकारी जमीनों की स्थिति, भूमि उपयोग की अनुमति और अवैध कॉलोनियों से संबंधित शिकायतों की जांच करनी चाहिए। जहां उल्लंघन प्रमाणित हों, वहां कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। इससे न केवल सरकारी जमीनों की सुरक्षा होगी, बल्कि आम लोगों का प्रशासन पर भरोसा भी मजबूत होगा।
भूदान की जमीनों पर भी विकसित हो रही है कॉलोनी
शिवपुरी शहर के आसपास भूदान की जमीन पर भी कालोनी विकसित की जा रही हैं, यह पर भोपाल में बैठे एक अधिकारी की सह पर भूदान की जमीनों पर कालोनी बसाने के खेल बड़े पैमाने पर खेला जा रहा है, इस पूरे मामले को अगर निष्पक्ष जांच कराई जाए तो शहर के भीतर करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन का भूदान घोटाले का खुलासा होता दिखाई देगा।
जनता पूछ रही है—बड़े भूमाफियाओं पर कार्रवाई कब?
शिवपुरी में अब सवाल केवल अतिक्रमण हटाने का नहीं, बल्कि भूमाफियाओं के खिलाफ घोषित अभियान के वास्तविक परिणामों का है। मेडिकल कॉलेज के सामने कार्रवाई हुई, लेकिन शहर की जनता जानना चाहती है कि बड़े और प्रभावशाली लोगों से जुड़े जमीन के मामलों में प्रशासन कब कदम उठाएगा।सिंधिया के निर्देशों के बाद कार्रवाई की उम्मीद जगी थी, लेकिन बड़े मामलों में ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस सवाल का जवाब कार्रवाई से देता है या भूमाफियाओं के खिलाफ मुहिम केवल निर्देशों और दावों तक सीमित रह जाती है।
बड़ा सवाल:
मेडिकल कॉलेज के सामने अतिक्रमण हटाने के बाद क्या प्रशासन बड़े भूमाफियाओं की जमीनों और कथित अवैध कब्जों की जांच भी करेगा, या रसूखदारों पर कार्रवाई का इंतजार यूं ही जारी रहेगा?

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